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टीचर... पेन हो रहा है... आह!"

ईशानी नीचे गिरी हुई थी... और उसके ऊपर दव गिरा हुआ था। गिरते समय देव का माथा पीछे रखी लकड़ी की ब्रांच से टकरा गया था, जिससे उसके माथे पर हल्की चोट लग गई थी। ईशानी के हाथ उसके शोल्डर पर थे।

देव की नज़र जैसे ही ईशानी के चेहरे से टकराई... वो एक सेकंड के लिए बिल्कुल फ्रीज़ हो गया। उसकी आँखें बस उसे ही देखती रह गईं। ईशानी ने झुंझलाकर आँखें रोल कीं और उसे हल्का धक्का दिया। "who the hell are you? उठो... मेरे ऊपर से!"

देव तुरंत हड़बड़ाकर उठ गया। "सॉरी... सॉरी टीचर ! आई एम रियली सॉरी... मैं... वो.."

ईशानी ने जैसे ही उसका चेहरा ठीक से देखा, वो खुद भी एक पल के लिए चौंक गई। उसने उंगली उसकी तरफ उठाई। "तुम... तुम तो देव हो ना? देव रायजादा...? तुम यहाँ क्या कर रहे हो?"

देव को एक सेकंड के लिए अपने ऊपर थोड़ा प्राउड

फील हुआ कि टीचर को उसका नाम याद है। वो तुरंत बोला, "टीचर आपको मेरा नाम याद है? Wow.. हां आखिर नाम याद हो भी कैसे ना मैं... वो मैं-"

लेकिन तभी उसने अपने माथे से बहते खून को देखा।

"आउच...!"

ईशानी का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। उसने अपनी मुट्ठियाँ कस लीं। पहले उसने अमित की तरफ देखा... फिर देव की तरफ। अब उसे समझते देर नहीं लगी कि देव यहाँ क्यों आया होगा।

वो ठंडे लेकिन सख्त स्वर में बोली- "जितना पूछा है उतना जवाब दो। तुम यहाँ क्या कर रहे हो... और ये सब क्या है?"

देव अपना माथा पकड़कर बैठ गया। चोट सच में लग गई थी। ईशानी ने जब खून देखा तो तुरंत अमित की तरफ मुड़ी। "फर्स्ट एड बॉक्स कहाँ है?"अमित तुरंत उठकर बाक्स ले आया और उनका सामने रख दिया। अब उसकी हालत भी थोड़ी खराब हो रही थी।

ईशानी ने एंटीसेप्टिक कॉटन पर लगाया और देव के माथे की चोट साफ करने लगी। देव दर्द से बोला, "टीचर... पेन हो रहा है... आह!"

"स्टैंड स्टिल!" ईशानी ने सख्ती से कहा। वो उसके माथे से खून साफ करती रही... फिर धीरे से फूँक मारकर बैंडेज लगा दिया।

उसका चेहरा अब भी ठंडा था... लेकिन देव की नज़रें अब भी उसी की आँखों पर टिकी हुई थीं। बैंडेज लगाकर वो सीधी खड़ी हो गई। "अब मुझे ये बताओ... तुम यहाँ क्या कर रहे हो? और ये भूत वाली कॉस्ट्यूम क्यों पहनी है?"

अमित अब तक पूरा कन्फ्यूज हो चुका था कि उसकी टीचर देव को पहले से कैसे जानती है। वो हड़बड़ाकर बोला, "वो... एक्चुअली टीचर... मैं..."

ईशानी ने अपने हाथ फोल्ड कर लिए और दोनों को घूरते हुए बोली- "टीचर को भगाने आए थे...?"देव ऑकवर्ड सी स्माइल करते हुए पास, एक्चुअली... मेरे फ्रेंड को होम ट्यूशन नहीं पढ़नी थी। यू नो व्हाट टीचर... वो अलरेडी 8 घंटे पढ़ता है। इसलिए मैं उसकी हेल्प करने आ गया था। मैं बहुत अच्छा फ्रेंड हूँ ना... इसलिए..."

ईशानी ने फिर से आँखें रोल कर लीं। उसने नीचे की तरफ देखते हुए गहरी साँस ली और फिर उसकी तरफ देखकर बोली - "अच्छा... तो तुम उसके बहुत अच्छे फ्रेंड हो? यू मीन... यू आर बेस्ट फ्रेंड?"

देव को जैसे इस बात पर थोड़ा प्राउड फील हुआ। वो तुरंत सीधा होकर बोला- "येस ! हम बेस्ट फ्रेंड हैं। और मैं उसकी हेल्प कर रहा था... ताकि टीचर डर जाए और भाग जाए। लेकिन टीचर तो आप निकलीं..."

अमित अब थोड़ा-बहुत समझने लगा था कि शायद ईशानी और देव एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। ईशानी धीरे से मुड़ी और अमित की तरफ देखने लगी। जैसे ही उसकी नज़र अमित पर पड़ी, अमित की हालत खराब हो गई। वो तुरंत सीधा होकर बैठ गया। ईशानी उसके सामने आकर खड़ी हो गई।

"ओके अमित... तुम मुझे बताओ-"

लेकिन ईशानी का सेंटेंस पूरा होने से पहले ही अमित जल्दी-जल्दी बोल पड़ा- "नहीं टीचर ! मैंने कुछ भी नहीं कहा। ये झूठ बोल रहा है। ये हमेशा ऐसा ही करता है। जो भी टीचर यहाँ पढ़ाने के लिए आती है ना... ये उन्हें डरा देता है!"

इतना बोलकर अमित अचानक चुप हो गया। क्योंकि उसने दरवाज़े की तरफ देखा... और वहाँ सरला खड़ी थी।

देव का चेहरा तो देखने लायक था। उसके चेहरे का रंग ही उड़ गया। जैसे ही वो कुछ बोलने वाला था, उसकी नज़र अमित पर पड़ी। अमित आँखों से उसे कुछ सीक्रेट कोड दे रहा था। देव तुरंत चुप हो गया। फिर उसकी नज़र भी दरवाज़े की तरफ गई... जहाँ सरला खड़ी थीं।

सरला अंदर आते ही बोली- "आई एम रियली सॉरी, टीचर... इस ट्रबल के लिए। एक्चुअली ये दोनों बेस्ट फ्रेंड हैं। और ये देव... ये थोड़ा ज्यादा ही मजाकिया है। इसलिए कभी-कभी यहाँ आ जाता है।"बोलते समय उनके चेहरे पर स्माइल थी। लेकिन अंदर ही अंदर उन्हें काफी गुस्सा आ रहा था। देव बेचारा तुरंत अपना सिर नीचे कर लेता है। ईशानी शांत स्वर में बोली-"आप जाइए... मैं सब कुछ हैंडल कर लूँगी।"

सरला ने देव की तरफ देखते हुए कहा- "हाँ देव बेटा... तुम भी चलो। मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है।"

लेकिन ईशानी तुरंत बोल पड़ी- "देव यहीं रहेगा। आप जाइए... मैं सब कुछ हैंडल कर लूँगी। देव भी मेरा स्टूडेंट है।"

सरला एक सेकंड के लिए हैरान हुई... फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली- "अच्छा... ये तो बहुत अच्छी बात है। ठीक है... फिर मैं चलती हूँ।"

जाने से पहले उन्होंने एक नजर अमित पर डाली ऐसी नजर... जिससे साफ समझ आ रहा था कि अब उसकी खैर नहीं है।सरला रूम से जैसे ही निकलती है, अमित और देव एक-दूसरे को देखने लगते हैं... जैसे दोनों कोई सीक्रेट कोड समझ रहे हों। लेकिन तभी ईशानी की नज़र उन पर पड़ती है, और दोनों तुरंत अपनी नज़रें नीचे कर लेते हैं।

ईशानी उन्हें देखते हुए पूछती है, "तो तुम दोनों एक ही क्लास में हो...?"

दोनों की एक साथ आवाज़ निकलती है। "यस, टीचर...!!"

ईशानी अपनी चेयर पर बैठते हुए शांत लेकिन सख्त आवाज़ में बोलती है, "ओके देव... नाउ इट्स योर पनिशमेंट टाइम।"

देव एकदम से सिर उठाकर कहता है, "पनिशमेंट...? लेकिन पनिशमेंट क्यों?"

ईशानी उसकी तरफ कड़क नज़रों से देखती है। देव तुरंत ऑकवर्ड-सी स्माइल दे देता है और थोड़ा बेपरवाही से कहता है। "टीचर... कौन-सी पनिशमेंट देंगी आप मुझे...?"वह "मुझे" शब्द को थोड़ा स्लो में खींचते हुए ईशानी की तरफ देखने लगता है। ईशानी भी बिना नज़र हटाए ठंडे स्वर में बोलती है। "हंड्रेड टाइम्स सीट-अप्स।"

देव को जैसे 440 वोल्ट का झटका लग जाता है। "क्या..!! टीचर आप क्रेज़ी हो क्या? मैंने अपनी पूरी लाइफ में इतने सीट-अप्स नहीं किए ! मैं नहीं करने वाला...!"

ईशानी गहरी सांस लेकर बिल्कुल शांत आवाज़ में कहती है। "ओके... तो मैं तुम्हारे डैड को इन्फॉर्म कर देती हूँ।

और तुम्हारा फुटबॉल ग्राउंड जाना भी बंद करवाती हूँ।"

देव तुरंत बोल पड़ता है। "लेकिन टीचर, आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती है...!!"

ईशानी उसकी बात सुने बिना ही कहती है. "योर टाइम स्टार्ट्स नाउ

Otherwise... I will inform your dad."

यह सुनते ही बेचारें देव की हालत खराब हो गई। वह गुस्से में ईशानी को घूरने लगा। लेकिन ईशानी बिल्कुल आराम से अपनी चेयर पर बैठी हुई थी, जैसे उसे देव की हालत से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा हो। वह शांति से अमित की किताब उठाकर उसका सिलेबस देखने लगी।

अमित भी धीरे से बैठ गया था। उसकी नजर बार-बार देव पर जा रही थी, और उसके चेहरे पर साफ लिखा था कि उसे देव के लिए बुरा लग रहा है। तभी ईशानी ने बिना ऊपर देखे कहा, "Focus on your books...! Dev, now only ten seconds again."

देव की तो जैसे सांस ही अटक गई। वह हड़बड़ाते हुए बोला, "क... क्या? टीचर, मैं कर रहा हूँ... फाइन, मैं कर रहा हूँ।"

गुस्से में उसने अपनी मुट्ठियाँ कसकर बंद कर लीं। उसके हाथ धीरे-धीरे जबरदस्ती कानों की तरफ उठने लगे। आखिरकार उसने आंखें कसकर बंद कीं और अपने कान पकड़ ही लिए। और जैसे ही उसने पहला sit-up किया, अमित उसे देखकर हैरान रहगया। उसकी आँखों में साफ-साफ disbelief था।

क्या सच में... अभी-अभी देव ने किसी टीचर की बात मानी है? अमित को तो अब भी यकीन नहीं हो रहा था।

क्योंकि ऐसे डायलॉग तो देव के बाकी टीचर्स भी दिया करते थे। लेकिन देव... वह तो आमतौर पर किसी की धमकी की परवाह ही नहीं करता था।

अमित को इतना जरूर समझ में आ गया था कि ईशानी उसकी भी टीचर है। कब से है, कैसे है। यह सब उसे अभी तक समझ नहीं आया था। लेकिन एक बात साफ थी... देव रायजादा किसी की बात मान रहा था। और यह बात अपने-आप में ही बहुत हैरान करने वाली थी। क्योंकि आमतौर पर, इतनी धमकियों के बाद भी देव किसी टीचर की बात नहीं मानता था।

तो फिर... ईशानी की बात वह इतनी आसानी से कैसे मान गया?वहीं दूसरी तरफ...

रागिनी अपनी फिल्म के सेट पर पहुंच चुकी थी। पूरा सेट हलचल से भरा हुआ था। हर कोई अपने-अपने काम में बिज़ी था। कोई लाइट्स एडजस्ट कर रहा था, कोई कैमरे का एंगल चेक कर रहा था, तो कोई अगले सीन की तैयारी में लगा हुआ था। सेट के बीचों-बीच एक बड़ी सी कुर्सी रखी थी जिस पर साफ अक्षरों में लिखा था Produceri

रागिनी धीरे से जाकर उसी चेयर पर बैठ गई। जैसे ही वह बैठी, उसका असिस्टेंट रवि तुरंत उसके पास आ गया। उसके हाथ में एक ट्रे थी। "मैम, जूस...." उसने विनम्रता से कहा।

रागिनी ने हल्की सी मुस्कान के साथ ग्लास ले लिया। "थैंक यू, रवि।"

आस-पास स्पॉट बॉय लोग इधर-उधर दौड़ रहे थे। लाइटमैन ऊपर लगे बड़े-बड़े लाइट्स को ठीक कर रहे थे। वहीं DOP (Director of Photography) कैमरे की सेटिंग चेक कर रहा था, और Assistant Director सबको निर्देश दे रहा

)था। रागिनी आराम से जूस पीते हुए यह सब देख रही थी।

तभी अचानक उसकी नजर थोड़ी दूर खड़े एक लड़के पर पड़ी। एक सेकंड के लिए वह उसे ध्यान से देखने लगी... और फिर उसके चेहरे पर धीरे-धीरे एक बड़ी सी प्यारी मुस्कान फैल गई। उसने हल्का सा सिर टेढ़ा करते हुए प्यार भरे अंदाज़ में कहा "अरे... बेबी? और मेरा बेबी यहाँ क्या कर रहा है...?"

क्योंकि वह कोई और नहीं, इवांश था। रागिनी तुरंत अपनी कुर्सी से उठी और जल्दी-जल्दी उसके पीछे जाने लगी। इवांश उस वक्त सेट के पीछे लगे बैकग्राउंड को ठीक कर रहा था। उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि कोई उसके पीछे खड़ा है। अचानक जब उसने मुड़कर देखा तो सामने रागिनी को खड़ा पाकर वह एकदम से ठिठक गया।

उसकी आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं। वहीं रागिनी के चेहरे पर वही प्यारी सी मुस्कान थी। उसने अपने हाथ को हवा में हल्का सा हिलाते हुए कहा- "हेलो तेत्ती ।।"

तब जाकर बेचारे इवांश को समझ में आया कि वह कोई सपना नहीं देख रहा। वह सच में यहाँ खड़ी थी। अगले ही पल उसके चेहरे पर झुंझलाहट आ गई। वह तुरंत बोल पड़ा - "आप... आप फिर से यहाँ...? आपको समझ में क्यों नहीं आता? आप मेरा पीछा क्यों कर रही हैं? मैंने कहा ना, मैं इंटरेस्टेड नहीं हूँ। प्लीज... मेरा पीछा छोड़ दीजिए।"

इवांश की बात सुनकर रागिनी ने भौंहें हल्की सी उठाईं और हैरानी से उसे देखने लगी। "यह तुम क्या बोल रहे हो, बेबी?" उसने कहा। "तुम यहाँ मेरे पीछे-पीछे आए हो... और अब मुझसे ही झूठ बोल रहे हो? झूठ बोलना बंद करो।"

इवांश पूरी तरह कन्फ्यूज़ हो गया। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या कह रही है। तभी रागिनी हल्की सी मुस्कान के साथ उसकी तरफ झुकते हुए बोली- "तुम्हें पता भी है... यह पूरा सेट किसका है?"

फिर उसने अपने दोनों हाथ फैलाते हुए पूरे सेट की तरफ इशारा किया। "I am the producer... रागिनी रायजादा।"उसकी आवाज़ में हल्का सा गर्व था। "बेबी, तुम मेरे बारे में नहीं जानते? तुम्हें पता भी है मैंने कितनी सारी मूवीज़ और सीरीज़ क्रिएट की हैं? मुझे कितने अवॉर्ड्स मिले हैं... और तुम्हें मेरे बारे में कुछ भी नहीं पता?"

वह थोड़ा और करीब आकर मुस्कुराते हुए बोली "तुम्हें यह भी नहीं पता... कि तुम जहाँ खड़े हो... यह मेरा सेट है।"

इवांश बस उसे देखता ही रह गया। कुछ सेकंड बाद उसने हल्का सा नज़रें चुराते हुए धीरे से कहा-"एम... सॉरी। आई हैव नो आइडिया। एक्चुअली... मैं यहाँ आज से ही पार्ट-टाइम जॉब कर रहा हूँ। मुझे सच में नहीं पता था कि आप एक प्रोड्यूसर हैं... और यह पूरा सेट आपका है...!"

उसकी बात सुनकर रागिनी के चेहरे पर फिर से एक प्यारी सी मुस्कान आ गई। इवांश की हाइट उससे थोड़ी ज़्यादा थी और उसने अपना चेहरा हल्का सा नीचे कर रखा था, इसलिए रागिनी को उसका चेहरा ठीक से देखने में थोड़ी परेशानी हो रही थी। वहहल्का सा अपना सिर टेढ़ा करके उसके चेहरे की तरफ देखने लगी, फिर मुस्कुराते हुए बोली- "इट्स ओके, बेबी। नो प्रॉब्लम... तुम्हें सॉरी बोलने की कोई ज़रूरत नहीं है।"

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लेकिन वह बार-बार "बेबी" बोल रही थी। आस-पास काम कर रहे कई स्टाफ मेंबर्स अब चुपके-चुपके उन्हीं दोनों की तरफ देखने लगे थे। बेचारे इवांश को अब सच में बहुत अजीब लगने लगा। वह तुरंत रागिनी की तरफ देखकर थोड़ा परेशान होकर बोला - "प्लीज़... आप मुझे बेबी बुलाना बंद करेंगी? सब लोग हमें ही देख रहे हैं...!"

उसकी बात सुनकर रागिनी फिर से हल्का सा मुस्कुराई।

वह बिल्कुल भी परेशान नहीं लग रही थी। उसने कंधे उचकाते हुए आराम से कहा- "तो देखने दो ना... लोगों का काम ही है देखना।"

उसकी आँखों में शरारत साफ दिखाई दे रही थी। तभी वहाँ एक स्टाफ गर्ल उनके पास आती है। वह दोनों को एक बार ऊपर से नीचे तक देखती है और फिर थोड़ी उत्सुकता से पूछती है। "मैम... क्या यहआपका बॉयफ्रेंड है? आप इन्हें बार-बार बेबी बोल रही हैं। लेकिन आपके बॉयफ्रेंड के बारे में तो किसी को भी नहीं पता। इन फैक्ट... आप तो सिंगल हैं ना? क्या यह सच में आपका बॉयफ्रेंड है?"

उसकी बात सुनते ही रागिनी का चेहरा एकदम लाल पड़ गया। वो एक सेकंड के लिए इवांश की तरफ देखती है और फिर जल्दी से बोल पड़ती है। "हाँ... हाँ... यह मेरा-"

लेकिन उसके बोलने से पहले ही इवांश घबराकर जल्दी से बोल पड़ा- "नहीं! नहीं! ऐसा कुछ नहीं है... हम लोग... हम लोग बस फ्रेंड्स हैं...!"

स्टाफ गर्ल दोनों की हालत देखकर हल्का सा मुस्कुराई।

"ओके... ओके... समझ गई।"

इतना कहकर वह वहाँ से चली गई। उसके जाते ही रागिनी हल्की सी मुस्कान के साथ इवांश की तरफ देखती है और शरारती अंदाज़ में कहती है। "देखा... लोग कह रहे हैं तो गाड़ी कहीं ना कहीं तो आगे बढ़ ही रही हैइवांश पूरी तरह कन्फ्यूज़ हो जाता है। वह उसे देखते हुए बोलता है। "आप क्या करने की कोशिश कर रही हैं? मुझे सच में कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है..."

तभी वहाँ रागिनी का असिस्टेंट रवि तेजी से आता है।

"मैम, सीन रेडी है... लेकिन एक्टर ठीक से कर नहीं पा रहा है।"

रागिनी पहले रवि की तरफ देखती है, फिर वापस इवांश की तरफ। वह हल्की सी मुस्कान के साथ कहती है। "ओके। बेबी, तुम यहाँ अपना काम अच्छे से करो... मैं अभी आती हूँ, ठीक है?"

उसने यह इतना प्यार से कहा कि बेचारे इवांश के गाल एकदम से लाल हो गए। वह तुरंत नज़रें चुराने लगा। वहीं खड़ा रवि अब कन्फ्यूज़ होकर इवांश की तरफ देखने लगा, जैसे वह समझने की कोशिश कर रहा हो कि आखिर चल क्या रहा है।

रागिनी बिना कुछ और बोले सीधे सेट की तरफ बढ़ जाती है, जहाँ सीन शूट होने वाला था।यह एक रोमांटिक सीन था। जहाँ गिरते हुए हीरो को हीरोइन बचाने वाली थी। असल में रागिनी की स्टोरीज़ इसी वजह से हिट होती थीं। उनका कॉन्सेप्ट हमेशा अलग होता था। जहाँ ज़्यादातर कहानियों में हीरो हीरोइन को बचाता था... वहाँ रागिनी की कहानियों में हीरोइन ज़्यादा स्ट्रॉन्ग होती थी। यहाँ भी वही होने वाला था।

हीरो पानी में डूबने की कोशिश करेगा... और हीरोइन उसे बचाएगी। यहीं से उनकी पहली मुलाकात शुरू होगी। डायरेक्टर थोड़ा परेशान होकर रागिनी के पास आया।

"मैम, अब आप ही समझाइए इन लोगों को... मैं तो समझा-समझा कर थक गया हूँ।"

रागिनी हल्की सी मुस्कान के साथ बोली- "ओके... मैं आ गई हूँ ना। मैं हैंडल कर लूँगी।"

वह आराम से सीन के पास चली गई। उधर... ना चाहते हुए भी इवांश की नज़रें बार-बार शूटिंग की तरफ जा रही थीं। वह खुद को रोकने की कोशिश कर रहा था... लेकिन उसकी नज़रें बार-बार रागिनी पर टिक जा रही थीं। सीन के अनुसार रागिनी कोपहले खुद डेमो देना था।

कहानी के हिसाब से हीरो पानी में कूदकर सुसाइड करने की कोशिश करेगा... और हीरोइन उसे बचाने के लिए पानी में कूदेगी। उसके लिए रागिनी को स्विमिंग सीन शूट करना था। रागिनी ने पहले अपना स्विमसूट पहना और ऊपर से एक हल्का सा कवर। जैसे ही वह कैमरे के सामने आई... कुछ सेकंड के लिए वहाँ खड़े लोगों की नज़रें उसी पर टिक गईं। उसकी बॉडी फिट और कॉन्फिडेंट थी... और कैमरे के सामने उसका प्रेजेंस बहुत स्ट्रॉन्ग लग रहा था।

हीरो तो बस उसे देखता ही रह गया। उधर... इवांश भी अनजाने में उसे देख रहा था। कैमरे की फ्लैशेस... वीडियो रिकॉर्डिंग.... और चारों तरफ लोगों की बातें।

"मैम की बॉडी लैंग्वेज कमाल है..."

"सच में, इन्हें एक्टर होना चाहिए था..."

"प्रोड्यूसर होते हुए भी इनकी एक्टिंग स्किल्स कमाल की हैं..."

"हर एक्टर को तुरंत सिखा देती हैं..."

हर तरफ बस रागिनी की तारीफ हो रही थी। रागिनीने हीरो के साथ क्लोज मूवमेंट दिखाकर हीरोइन को समझाया कि उसे सीन कैसे करना है। वह पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सीन समझा रही थी। लेकिन यह सब देखते हुए... इवांश के अंदर अजीब सी बेचैनी होने लगी।

उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है।

अचानक उसने नज़रें हटा लीं और दूसरी तरफ मुड़ गया।

अपने आप से बुदबुदाते हुए बोला- "व्हाट द हेल.... मुझे क्या फर्क पड़ता है... वह कुछ भी करें... कैसे भी कपड़े पहनें... कोई भी उनके बारे में कुछ भी बोले... मुझे फर्क नहीं पड़ता। उसने गहरी सांस ली। । don't care."

लेकिन दिल शायद उसकी बात से सहमत नहीं था।

Guy sorry late chapter ka liya but mere paper chal raha tha isliye mai nahi de pa rhi hu but ab chapter aayega so like and comment kiya kare

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sunrise

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