शहर के शोर से दूर, गुलमोहर के पेड़ों से घिरे उस आलीशान बंगले के अंदर सन्नाटा पसरा था । बाहर दोपहर की चिलचिलाती धूप थी, लेकिन प्रोफेसर आदि के ड्रॉइंग रूम में एयर कंडीशनर की हल्की सी सनसनाहट एक अजीब सी ठंडक पैदा कर रही थी। कॉफी टेबल पर रखी वो भारी भरकम गणित की किताब उन दोनों के बीच एक अनकही दीवार की तरह खड़ी थी। आदि के बालों में चांदी जैसी सफेदी दोपहर की छनकर आती रोशनी में चमक रही थी। उन्होंने चश्मा उतारकर मेज पर रखा और अपनी उंगली किताब के पन्ने पर टिकाते हुए बड़े धैर्य से कहा, "स्वीटी, ये फंडामेंटल थ्योरम है। इसे सिर्फ रटना नहीं है, इसे महसूस करना है। गणित और जीवन में एक ही समानता है, अगर बेसिक्स समझ आ जाएं, तो रिजल्ट हमेशा पॉजिटिव होता है।"
अठारह साल की स्वीटी, जो पिछले दो घंटों से calculus के सवालों में उलझकर हार मान चुकी थी, ने अपने कंधे झुका दिए । उसने अपने रेशमी काले बालों की एक लट कान के पीछे की और अपनी बड़ी - बड़ी, मासूम आंखों से आदि की ओर देखा । "मुझे पता है प्रोफेसर आदि, पर ये सब मेरे सिर के ऊपर से जा रहा है। मैं कितनी भी कोशिश ।"ड्रॉइंग रूम में एक भारी खामोशी छा गई। स्वीटी के माता - पिता शहर से बाहर थे, और ये इकलौता मौका था जब आदि उसे अकेले में 'स्पेशल ट्यूशन' दे सकते थे। आदि, जिनकी उम्र 40 साल थी, इस एकांत की कीमत बखूबी जानते थे। उनकी आँखों में एक अनुभवी शिकारी जैसी चमक थी, जिसे स्वीटी अपनी नादानी में 'गुरु का स्नेह' समझ रही थी
आदि ने अचानक किताब को एक जोरदार धमक के साथ बंद किया । स्वीटी डर कर थोड़ी पीछे हुई । आदि की आवाज़ अब और गंभीर और थोड़ी ठंडी हो गई थी। "मंडे मॉर्निंग को तुम्हारी मिडटर्म रिपोर्ट मेरे डेस्क पर होगी, स्वीटी। और इन मौजूदा ग्रेड्स के साथ, एक प्रोफेसर के तौर पर मेरे पास तुम्हें फेल करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा ।"
उन्होंने शब्दों को हवा में तैरने दिया, जैसे वो देख रहे हो कि उनका डर स्वीटी के चेहरे पर क्या रंग लाता है। स्वीटी का चेहरा पीला पड़ गया। "प्रोफेसर, प्लीज," उसने थरथराते होंठों से कहा, "मेरे डैड बहुत सख्त हैं। अगर मैं फेल हुई तो वो मेरा कॉलेज छुड़वा देंगे । क्या... क्या कोई रास्ता है ? मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ।"आदि सोफे पर पीछे की ओर झुके और उसे ऊपर से नीचे तक निहारा। पीले स्वेटर में लिपटी उसकी मासूमियत किसी खिलते हुए फूल की तरह थी, जिसे कुचलने का अपना ही एक आनंद था। उन्होंने अपनी आवाज़ को मखमली और गहरा करते हुए कहा, "शायद एक रास्ता है। मैं तुम्हारी रिपोर्ट पर पासिंग ग्रेड लिख सकता हूँ, लेकिन इस 'एक्स्ट्रा क्रेडिट' के लिए मुझे तुमसे कुछ चाहिए। मैं तुम्हारे ब्रेस्ट्स चूसना चाहता हूँ।"
स्वीटी की सांसें जैसे थम गई। उसने एक दो बार पलकें झपकाई । उसके चेहरे पर घृणा नहीं, बल्कि एक गहरी उलझन थी। "चूसना ... मतलब ? प्रोफेसर, मैं समझी नहीं... ये पढ़ाई का हिस्सा कैसे हो सकता है ?"
आदि के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई । उसकी यही बेदाग मासूमियत उनके लिए सबसे बड़ा नशा थी। "ये भरोसे का एक नया पाठ है, स्वीटी I calculus की तरह इसमें भी variables होते है... अहसास, गर्माहट और समर्पण। क्या तुम ये पाठ सीखना चाहोगी ?"स्वीटी ने उनकी आँखों की गहराई में कुछ तलाशने की कोशिश की। उसे लगा शायद ये कोई exam है। पर उसे एक excitement भी अंदर ही अंदर उमड़ रही थी। तो उसने सर हिलाकर सहमति दी ।
"गुड गर्ल," आदि ने धीमी आवाज़ में कहा, जो स्वीटी के कानों में किसी मंत्र की तरह लगा। "अब, सबसे पहले हमें उस बाधा को हटाना होगा जो पढ़ाई में आ रही है। अपने हाथ ऊपर उठाओ ।"
स्वीटी ने कांपते हाथों से अपना पीला स्वेटर ऊपर उठाया । "हम्म्म्म..." उसकी एक दबी हुई आवाज़ कमरे में गूंजी। जब स्वेटर उतरा, तो वो केवल एक पतली सफेद ब्रा में थी। आदि ने बिना वक्त गंवाए उसके पीछे हाथ पहुँचाया। जैसे ही ब्रा का हुक खुला, स्वीटी के मुंह से एक तीखी सिसकारी निकली, "ओह्ह.." उसका सीना अचानक आज़ाद होकर नग्न हो गया। ऐसे की ठंडी हवा ने उसकी नाजुक त्वचा को छुआ, जिससे उसकी गुलाबी peaks पल भर में सख्त हो गई। आदि धीरे धीरे उसके करीब आए, उनकी सांसों की गर्माहट अब स्वीटी के सीने पर महसूस हो रही थी।जैसे ही आदि ने अपना मुंह उसके बाएं सीने पर रखा, स्वीटी का पूरा बदन बिजली के झटके की तरह उछला । "आहह्ह सर !" (Ahhh Sir!)
उसके गले से एक चीख निकली जो आधे अचरज और आधे excitement से भरी थी। आदि ने अभी सिर्फ अपनी जीभ से उसके कोमल peak को छुआ था। स्वीटी की आंखें मुंद गई और वो सोफे के हैंडल को कसकर पकड़ने लगी। "हहह . हहह... सर, ये... ये क्या हो रहा है?"
वो हांफ रही थी। आदि ने अब अपनी पकड़ मजबूत की और धीरे - धीरे चूसना शुरू किया। स्वीटी के मुंह से अब बेतहाशा आवाजें निकलने लगी, "आह्ह्ह ! ओह गॉड... उफ़्फ़्फ !" (Ahhh! Oh God Ufff !) उसे अपने शरीर के निचले हिस्से में एक अजीब सी हलचल महसूस होने लगी ।
आदि ने उसे छोड़ा नहीं, बल्कि अपनी जीभ के करतब और बढ़ा दिए। उसकी सिसकारियां अब और गहरी और मदहोश करने वाली थीं। "नहहह... आह ! सर. प्लीज..." वो समझ नहीं पा रही थी कि वो इस सुख से भागना चाहती हैया इसमें डूबना । आदि ने दूसरी तरफ रुख किया और वही प्रक्रिया दोहराई। स्वीटी अब सोफे पर बेदम होकर गिर चुकी थी, उसकी टांगें आपस में रगड़ रही थीं और उसके होंठों से बस "हहह. आह्ह..." की ध्वनियाँ निकल रही थी। जब आदि अंत में पीछे हटे, तो स्वीटी के सीने पर उनकी लार चमक रही थी और वो बुरी तरह हांफ रही थी।
"ये सिर्फ शुरुआत है, स्वीटी," आदि ने कहा । उन्होंने उसका हाथ पकड़ा और उसे उसकी जींस के ऊपर, ठीक उसकी जांघों के मिलन स्थल पर रखा । स्वीटी की एक लंबी, कंपकंपाती आह निकली, "ओह्ह्ह्ह...!" आदि ने उसका हाथ वहां दबाते हुए कहा, "तुम्हारी थ्योरी पूरी हुई, अब प्रैक्टिकल की बारी है। मुझे दिखाओ कि मेरी दी हुई इस उत्तेजना ने तुम्हें अंदर से कितना बेचैन किया है। खुद को छुओ और अपनी तड़प मुझे दिखाओ।" स्वीटी ने गीली आँखों से उनकी ओर देखा और सिसकते हुए कहा, "आह... सर, मुझे... मुझे बहुत अजीब लग रहा है... जैसे मैं पिघल रही हूँ..."
आदि ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया, "तो पिघल जाओ, स्वीटी। आज कोई किताब तुम्हें नहीं बनाएगी ।"
Guy like and comment karna and plz batana kaise lage baki sba ko bhai share karna ap sab story meri



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